Dantprabha Churan
दन्तप्रभा चूर्ण (मंजन)
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : खड़िया मिट्टी ६ तोला, सफेद कत्था ५ तोला, दालचीनी ४ तोला, मौलश्री की छाल, अजवायन, सेंधा नमक, काली मिर्च, भिलावे की राख, सोंठ, बदाम-शिलका की राख, जायफल, अकरकरा, लौंग, माजूफल, इलायची-ये दवाएँ ३-३ तोला, शुद्ध तूतीया,कपूर और शंख-प्रत्येक १-१ तोला, पोटास परमैंगनेट ३ माशा-सबको कूटपीस कपड़छन चूर्ण बना शीशी में रख लें। |
गुण और उपयोग–
- इसको दही में मिलाकर मँह के छालों पर लगाने से छाले बहत शीघ्र नष्ट हो जाते हैं।
- इसके मंजन से दाँत का दर्द, दाँत से खन जाना, पुराना पायरिया, मँह की दर्गन्ध, दाँत में कीड़े हो जाना, दाँतों का मैल, असमय में ही दाँत हिलना आदि विकार नष्ट हाते हैं।
दूसरा–बादाम के छिलके की राख, मौलश्री की छाल का चूर्ण, खड्या मिट्टी अगर लकड़ी का कोयला- प्रत्येक ४-४ तोला, फिटकरी भुनी हुई १ तोला, सेंधा नमक ६ माशा, असली कपूर ३ माशा, शुद्ध तृतिया ४ रत्ती-सबका महीन कूट-पीस कर कपड़छन चर्ण बना लें, फिर उसमें १ माशा पिपरमेंट का सत मिला कर चौड़े मुँह की शीशी में भर कर रख दें। . व्यवहार–यह सगन्धित मंजन है। सुबह-शाम इसका मंजन करना बहुत गुण-दायक है।
गुण और उपयोग—
- मुँह की दुर्गंध नष्ट करना इसका प्रधान गुण है।
- दाँतों के सब विकारों को नष्ट कर मोती के समान चमका देता है।
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