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    Post Views: 301 प्रवाहिकाहर चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : पोस्त के दाने, मोचरस, राल, बड़ीमाई तुरंजवीन, धाय के फूल–प्रत्येक १-१ तोला और रूमीमस्तंगी २ तोला लें। पहले मोचरस और पोस्त के.दाने तवे पर डाल कर भन लें बाद में सब चीजों को कट-कपड़छन चर्ण बना कर रख लें। मात्रा और अनुपान–६ माशे से…

  • Triphala Churan

    Post Views: 243 त्रिफला चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि:   हरड़ का छिलका, बहेड़े का छिलका, आँवला-गुठली रहित-प्रत्येक 1-1 भाग लेकर सूक्ष्म चूर्ण करके सुरक्षित रख लें।-शा. सं. मात्रा और अनुपान 3-9 माशे तक, रात को सोते समय गरम जल से या दूध के साथ अथवा विषम भाग घी और शहद के साथ दें। गुण…

  • Ashawgandhadi Churan

    Post Views: 269 अश्वगन्धादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: असगन्ध 40 तोला, विधारा 40 तोला लेकर इन दोनों को कूटकर सूक्ष्म चूर्ण करके सुरक्षित रख लें। मात्रा और अनुपान: 3-6 माशे तक सुबह-शाम दूध या जल के साथ दें। गुण और उपयोग: इस चूर्ण के सेवन से वीर्यविकार, शुक्रक्षय, वीर्य का पतलापन, शिथिलता, शीघ्रपतन,…

  • Madhur Virachan Churan

    Post Views: 270 मधुर विरेचन चूर्ण गुण ओर उस्योग– यह चूर्ण कोष्ठ-शुद्धि के लिए तथा आँव के दस्तो में विशेष गुणकारी है। पेचिश की प्रारम्भिक अवस्था में– आव निकलने में बहुत दर्द होता है, आँतों में ऐंठन और दर्द बहुत जोर से होता है, रोगी को कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती, खुलकर आँव…

  • Tikshan Virachan Churan

    Post Views: 238 तीक्ष्णविरेचन चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि:  इद्रायण की जड़ 1 तोला, निशोथ 2 तोला, कालादाना भूना 2 तोला, सनाय की पत्ती 2 तोला, हरड़ का छिलका 1 तोला, कालानमक 1 तोला लेकर समस्त द्रव्यों को एकत्र मिला, कूटकर सूक्ष्म चूर्ण करें। मात्रा और अनुपान 1 ।। माशे से 6 माशे तक…

  • Lai Churan

    Post Views: 307 लाई चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— इस चूर्ण के सेवन से संग्रहणी, शूल, अफरा ओर अतिसार का नाश हाता तथा मर्न्दाग्न दूर हाती ह ओर पाचन शक्ति बढ़ता है। संग्रहणी की प्रारम्भिक अवस्था मे इसक उपयोग से बहुत लाभ होता है। यह पाचक पित्त को उत्तजित कर पाचन क्रिया…