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    Post Views: 271 दन्तप्रभा चूर्ण (मंजन) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : खड़िया मिट्टी ६ तोला, सफेद कत्था ५ तोला, दालचीनी ४ तोला, मौलश्री की छाल, अजवायन, सेंधा नमक, काली मिर्च, भिलावे की राख, सोंठ, बदाम-शिलका की राख, जायफल, अकरकरा, लौंग, माजूफल, इलायची-ये दवाएँ ३-३ तोला, शुद्ध तूतीया,कपूर और शंख-प्रत्येक १-१ तोला, पोटास परमैंगनेट ३ माशा-सबको…

  • Bakuchiadi Churan

    Post Views: 330 बाकचिकाद्य चूर्ण गुण और उपयोग — यह चूर्ण रक्तशो धक, विरेचक आर कृष्ठघ्न है। इसके सेवन से रफ्त-विकार, कष्ट, वातरक्त, शरीर पर होने वाली छोटी-छोटी फंसियाँ आदि विकार नप्ट हा जात है। मात्रा और अनुपान–२ से४ माशा तक गुर्च (गिलोय ) के क्वाथ या जल के साथ दें। मुख्य सामग्री तथा बनाने…

  • Pardarnashak Churan

    Post Views: 188 प्रदरनाशक चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : पुष्यानुग चूर्ण ५ तोला, खुनखराबा, आंवला, राल, अशोक की छाल, संगजराहत गेरूमिट्टी, नागकेशर-प्रत्येक समान भाग लेकर एकत्र मिला करके कूट-कपड़छन चूर्ण करें। पश्चात्‌ पुष्यानुग चूर्ण और उपरोक्त द्रव्यों के चूर्ण को एकत्र मिला सुरक्षित रख लें। मात्रा और अनुपान–१।।-३ माशे तक शहद के साथ…

  • Punarnavadi Churan

    Post Views: 271 पुनर्नवा चूर्ण गुण और उपयोग– इसके सेवन से समस्त शरीर पर फैला हुआ शोथ-रोग दूर हो जाता है तथा उदर रोगों का नाश करता है। | इसमें पुनर्नवा की प्रधानता होने से यह चूर्ण दीपक, पाचक, दस्तावर, मृत्रविरेचक (मूत्र लाने वाला) तथा शोथ-नाशक है। इस चूर्ण का प्रधान गुण पेशाब खुल कर…

  • Narsingh Churan

    Post Views: 331 नारसिह चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : शतावर ६४ तोला, छोटा गोखरू ६४ तोला, बाराहीकन्द ८० तोला, गिलोय १०० तोला, शुद्ध भिलावा १२८ तोला, चित्रकमूल की छाल ४० तोला, धोये हए तिल ६४ तोला, दालचीनी, तेजपात और छोटी इलायची–प्रत्येक ११-११ तोला, मिश्री २८० घ्य विदारीकन्द ६४ तोला लें, सब का एकत्र…

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    Post Views: 353 हृद्य चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits ) – हृदय की दुर्बलता (धड़कन), नाड़ी वेगाधिक्य–इन लक्षणों में इस चूर्ण का प्रयोग करें। हृदय रोग मे उपद्रव रूप मे जब सर्वांग शोथ हो तब आरोग्य वद्धनी के साथ मिलाकर इसका उपयोग करने से विशेष लाभ होता हैं। पुरानी खाँसी मं जब कफ…