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    Post Views: 254 सर्वज्वरहर लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह सब तरह के ज्वरों के लिए प्रसिद्ध है। इससे वातज, पित्तज, कफज, नये-पुराने ज्वर, सन्निपातज्वर, विषमज्वर, धातुगतज्चर तथा जाड़ा देकर आने वाले ज्वर आराम होते हैं। इसमें लौह का प्रधान मिश्रण होने के कारण यह मन्दाग्नि, अतिसार, प्लीहा, यकृत्‌, गुल्म, आमवात, अजीर्ण, ग्रहणी,…

  • Baljwarankush Ras

    Post Views: 17 बालज्वरांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  पारद भस्म (रससिन्दूर), अभ्रक भस्म, बंग भस्म, चाँदी भस्म 1-1 तोला, ताम्र भस्म और फौलाद भस्म तथा सोंठ, मिर्च, पीपल, बहेड़ा, कसीस भस्म 2-2 तोला लेकर सब का महीन चूर्ण करके, उसे पान के रस की कई भावनाएँ देकर…

  • Jiranjwarankush Ras

    Post Views: 26 जीर्णज्चरांकुश रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   रससिन्दूर, अभ्रक भस्म, नाग भस्म, ताम्र भस्म, कान्तलौह भस्म, वैक्रान्त भस्म, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध टंकण, शुद्ध गन्धक, शुद्ध विष और कूठ ये सब द्रव्य 1-1 भाग लेकर प्रथम रससिन्दूर को खरल में डालकर सूक्ष्म मर्दन करें, पश्चात्‌ अन्य भस्में…

  • Shantivardhak Churan

    Post Views: 303 शान्तिवर्धक चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— यह चूर्ण स्वादिष्ट, दीपक, पाचक एवं उत्कृष्ट रुचिवर्द्धक है। इस चूर्ण के सेवन से मन्दग्नि, भूख न लगना, जी मिचलाना, अपचन, अफरा, अम्लपित्त और समस्त प्रकार के उदरशूल आदि विकार नष्ट होते हैं। स्वादिष्ट होने के कारण इस चूर्ण को बच्चे बड़े प्रेम…

  • Shilajitavadi Loh

    Post Views: 296 शिलाजत्वादि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इस लौह का उपयोग करने से समस्त प्रकार के राजयक्ष्मा रोग नष्ट होते हैं और रक्त क्षय, रक्ताल्पता (एनीमिया), जीर्णज्चर, पाण्डुरोग, रक्तपित्त, क्षय, काम, प्रमेह इनको नष्ट करता है। शरीर में रक्ताणुओं की वृद्धि कर नवीन रक्त को उत्पन्न करता है। बल, वर्ण…

  • Laxminarayan Ras

    Post Views: 14 लक्ष्मीनारायण रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध हिंगुल, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, सुहागे की खील, कुटकी, अतीस, पीपल, इन्द्रजौ, अभ्रक भस्म, सेन्धा नमक–प्रत्येक समभाग लेकर सबको एकत्र खरल करके दन्तीमूल और त्रिफला के रस में पृथक्‌-पृथक्‌ 3-3 दिन घोंट कर 2-2 रत्ती की गोलियाँ बना…