Chanderanshu Ras
चन्द्रांशु रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, अभ्रक भस्म, लौह भस्म, बंग भस्म-प्रत्येक दवा समान भाग लेकर, प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, पश्चात् अन्य भस्में मिलाकर घृतकुमारी के रस में घोंट कर 2-2 सत्ती की गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें। —भै. र.
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1- 1 गोली सुबह-शाम, जीरा-क्वाथ, गो-दुग्ध, जटामांसी-क्वाथ अथवा रोगानुसार अनुपान के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इस रसायन के सेवन से गर्भाशय-दोष, योनि-शूल, योनि में पीड़ा एवं दाह होना तथा योनि की स्थान-भ्रष्टता (अपने स्थान से टल जाना, विकृत हो जाना आदि), योनि में खाज चलना तथा रजोदोष, कामवासनाओं की शान्ति न होने के कारण उत्पन्न हिस्टीरिया आदि विकार शीघ्र दूर हो जाते हैं। इससे गर्भाशय बलवान हो जाता और उसमें गर्भधारण की शक्ति पैदा होती है।
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