Similar Posts

  • Arshoghan Vati अशोघ्नी बटी

    Post Views: 395 मुख्य सामग्री: निंबोली (नीम के फल की मींगी) ​बकायन के फल की मींगी खून खराबा (यूनानी दमउल् अखवेन) तृणकान्त (यूनानी कहरवा) मणि की अर्क गुलाब से बनाई हुई पिष्टी शुद्ध रसौत (दारुहल्दी का घन सत्त्व) बनाने की विधि : निंबोली (नीम के फल की मींगी) 2 तोला, बकायन के फल की मींगी…

  • Takra Vati

    Post Views: 454 तक्रबटी मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक ।-। तोला, शुद्ध बच्छनाग 2 माशा, ताम्र भस्म 4 माशा, है पीपल और मण्डूर भस्म १-१ तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना लें, फिर अन्य औषधियों का चूर्ण मिला कर सबको 7 दिन तक काले जीरे के रस में घोंट…

  • Arshoghan Vati

    Post Views: 258 अर्शोऽघ्नी बटी    गुण और उपयोग (Uses and Benefits) – यह दोनों प्रकार के बवासीर (खूनी -बादी) के लिए उत्तम दवा है। खूनी बवासीर में जब जोरों का रक्तस्राव हो रहा हो, तो इस बटी के प्रयोग से बहुत शीघ्र रक्त बन्द हो जाता है। नियमित रुप से इस बटी का सेवन…

  • Chandanadi Vati

    Post Views: 135 चन्दनादि बटी: मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : श्वेत चन्दन का बुरादा, छोटी इलायची के बीज, कबाबचीनी, सफेद राल, गन्ध-बिरोजा का सत्त, कत्था और आमला–प्रत्येक 4-4 तोला, गेरू 2 तोला और कपूर तोला ले कपड़छन चूर्ण बना, उसमें १। तोला उत्तम चन्दन तैल (इत्र) तथा 4 तोला रसोत मिला कर 3-3 रत्ती…

  • Karpuradi Vati

    Post Views: 137 कर्पूरादि बटी(Karpuradi Vati) मुख्य सामग्री: कपूर 2 तोला जायफल सुपारी लौंग छोटी इलायची के बीज कबाब चीनी शुद्ध टंकण शुद्ध फिटकरी मिश्री – प्रत्येक 1-1 तोला। समान भाग लेकर पानी में खरल करके मूँग के बराबर गोलियाँ बना रख लें। छाया में सुखाकर रख लें। कत्था 3 तोला लेकर सब द्रव्यों को…

  • Amritprabha Vati

    Post Views: 410 अमृतप्रभा बटी गुण और उपयोग (Uses and Benefits )– इस बटी का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के अजीर्ण रोग समूल नष्ट होते हैं और प्रकूपित आम या कफ-दोष का पाचन कर जठराग्नि प्रदीप्त करती है। इसके अतिरिक्त अरुचि, आध्मान, ग्रहणी रोग, अर्श, पाण्डु रोग, शूल रोग और अन्य उदर रोगों को…