Balchander Ras
बालचन्द्र रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – स्वर्ण भस्म 1 तोला, शुद्ध सोना गेरू 3 तोला, मुक्तापिष्ठी 12 तोला लें। इन तीनों को एकत्र मिला अच्छी तरह खरल कर सुरक्षित रख लें।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 1-1 रत्ती दिन मैं 3-4 बार मक्खन-मिश्री, सत गिलोय, शर्बत अनार तथा दाडिमावलेह के साथ दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- राजयक्ष्मा रोग में होने वाले उपद्रवो–वमन, जी मिचलाना, आतिसार (पतले दस्त आना), उवास, जुकाम, सूखी खाँसी और रक्त-पित्त आदि को दूर करता हें और कृत्रिम विष का नाशक है।
- मस्तक और वातवाहिनियों पर शामक असर पहुँचाता है तथा पाचन संस्थानगत सेन्द्रिय विष को नष्ट करता है।
- पित्तजनित विकारों, हृदय के विकारों तथा रक्तचाप की वृद्धि में इस रसायन से अच्छा लाभ होता है।
- यह अतीव सौम्य एवं बलवर्द्धक श्रेष्ठ महौषधि है।
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