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  • Jwaharmohra Number 1

    Post Views: 18 जवाहर मोहरा नं० – 1 ( स्वर्ण-मुक्ता-कस्तूरी-अम्बर-युक्‍त ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   माणिक्य पिष्टी 2 तोला, पन्ना पिष्टी 2 तोला, मुक्ता पिष्टी 2 तोला, प्रवाल पिष्टी 4 तोला, संगेयशव पिष्टी 4 तोला, कहरवा पिष्टी 2 तोला, वरक चाँदी तोला, वरक सोना 1,तोला, दरियाई नारियल…

  • Vasa Haritiki Avleh

    Post Views: 303 वासाहरीतकी अवलेह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से खाँसी, क्षय, श्वास, रक्तपित्त और प्रतिश्याय (जुकाम) में फायदा होता है। नवीन और प्राचीन कफरोग अथवा खाँसी या श्वासनलिका की सूजन में इस अवलेह के सेवन से बहुत लाभ होता है। इससे कफ पतला होकर शीघ्र बाहर निकल जाता है, जिससे…

  • Amarsunderi Vati

    Post Views: 27 अमरसुन्दरी बटी मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  सोंठ, पीपल, काली मिर्च, आँवला, हरे, बहेड्डा, रेणुका, पीपला-मूल, चित्रक-मूल-छाल, लौहभस्म, दालचीनी, तेजपात, नागकेशर, इलायची छोटी, शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, शुद्ध बच्छनाग, वायविडंग, अकरकरा, नागरमोथा–प्रत्येक दवा 1-1 तोला और गुड दूना (40 तोला) मिलाकर चने के बराबर गोलियाँ बनावें।…

  • Tribhuvankiriti Ras

    Post Views: 79 त्रिभुवनकीर्ति रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध हिंगुल, शुद्ध बच्छनाग, सोंठ, पीपल, काली मिर्च, सुहागे की खील (फूला) और -पीपलामूल-इन सबको समान भाग लें, कूट कपड़छन कर महीन चूर्ण बना, तुलसी, अदरक और धतूरे के रस की 3-3 भावना देकर 1-1 रत्ती की गोलियाँ…

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    Post Views: 157 क्षार तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल के उपयोग से समस्त प्रकार के कर्णरोग जैसे कर्ण पूय (कान से मवाद या पीब आना) कर्ण नाद (कान में भाँति-भाँति के शब्द सुनाई देना) कर्ण शूल (कान का दर्द) बधिरता (बहरापन) कर्ण-कृमि (कान में कृमि उत्पन्न होना) कान-सम्बन्धी अन्यान्य रोगों एवं…