Baal Panch Bhadar Ras
बालपञ्चभद्र रस
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation) – यशद भस्म 6 माशा, रससिन्दूर 1 तोला, गोरोचन 1 तोला, शुद्ध गंधक 1 तोला और गोदन्ती भस्म 8 तोला लें। सबको एकत्र कर खरल में घोंटकर रख लें।
नोट: गोदन्ती भस्म की बजाय कुक्कुटाण्डत्तक् भस्म डालकर बनाने पर भी यह योग उत्तम बनता है और बाल रोग में विशेष लाभ करता है।
मात्रा और अनुपान (Dose and Anupan)– 2 मे 4 रत्ती शहद में मिलाकर चटावें और ऊपर से गाय का दूध पिला दें।
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- छोटे-छोटे बच्चों को बराबर ज्वर रहने के कारण शरीर में रक्त की कमी हो जाने से शरीर दुर्बल और पाण्डु वर्ण का हो जाता है, जिससे शरीर पीला दीखता है। बच्चों की हड्डियाँ उभर आती हैं, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, अधिक काल रोता ही रहता है, सिर के बाल भी उड़ जाते हैं, श्वास लेने में भी कष्ट होता है। दस्त फटे हुए पोले रङ्ग के होते हैं तथा मूत्र भी पीला होता है। ऐसी स्थिति में बाल पञ्चभद्र रस के उपयोग से फायदा होता है।
- सूखा रोग आजकल इस रोग का प्रसार बच्चों में बहुत जोरों से है। बच्चे इस विकराल रोग के पन्जे में पड़कर असमय में ही अपनी जीवन-लीला सदा के लिए समाप्त कर देते हैं। इस दुष्ट रोग ने न जाने कितने होनहार भारतीय बच्चों को बिलखती हुई माताओं की गोद से बलात् खींचकर उनकी गोद को खाली कर दिया है। न जाने कितने घरों का चिराग गुल कर उनमें अन्धकार का साम्राज्य स्थापित कर दिया है। न जाने कितने माता-पिताओं की भावी आंशा को धूल में मिला, उन लोगों को धूर्त लोगों के चक्कर में धूल फँका-फँका कर इस संसार में भटकाया है। ऐसे कठिन रोग से अपनी सन्तान की रक्षा करना प्रत्येक के लिए आवश्यक है।
- इस रोग का प्रारम्भ कफ प्रकुपित होकर ज्वर के साथ होता है। इसमें ज्वर की गति बराबर तेज ही बनी रहती है। कफ भी बढ़ता रहता है। बच्चा सूखता जाता है। अस्थियों में चूने (कैल्शियम) की कमी के कारण हड्डियाँ कमजोर हो जातीं, विशेषतः कमर के नीचे की हड्टियाँ बिल्कुल नरम हो जाती हैं, जिससे बच्चा खड़ा होकर चल-फिर भी नहीं सकता। आँखें नीचे धस जातीं, गालों में गड्ढे पड़ जाते, कान की पाली (लौ) मोटी हो जाती, इसे दबाने से दर्द होता, चूतड़ों (नितम्बो) की खाल लटकने लग जाती है। पतले बदबूदार दस्त होने लगते, शरीर कान्तिहीन तथा एक ढाँचा-सा दिखाई पड़ने लगता है। ऐसी भयंकर स्थिति में इस रसायन के उपयोग से बहुत फायदा होता है, क्योंकि इस रोग में कैल्शियम की पूर्ति करना आवश्यक रहता है, जो इस दवा से अच्छी तरह हो जाता है। यह दवा कफ और ज्वर को भी दूर कर शरीर में नवीन रक्त उत्पन्न करके, रोगी को स्वस्थ कर देती है।
- डब्बा रोग माता के कफकारक शीत आहार-विहार से या मौसम की खराबी अथवा दुग्धदोष आदि अन्य कारणों से छोटे बच्चों को कफ बढ़ कर प्रथम प्रतिश्याय हो जाता है, योग्य उपचार न होना या उपेक्षा के कारण फुफ्फुसों तथा आमाशय में कफ संचित होकर श्वास मार्ग का अवरोध करने लगता हैं, एवं ज्वर और खाँसी भी उत्पन्न हो, श्वास लेने पर पसलियों के दोनों तरफ नीचे के भाग में प्रश्वास के समय गड्ढे पड़ने लगते हैं। इस रोग में तुलसी या पान के रस के साथ मधु में मिला कर इस रस के सेवन से अच्छा लाभ होता है।
This content is for informational purposes only. Always consult a certified medical professional before using any medicines.
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