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    Post Views: 287 दशनसंस्कार चूर्ण (मंजन) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : सोंठ, हें, मोथा, कंत्था, कपूर, सुपारी की राख, कालीमिर्च, लौंग और दालचीनी सब चीजें समान भाग लेकर कूट-कपड़छन कर महीन चूर्ण बना लें। इस चूर्ण के समान : भाग खडिया मिट्टी का चूर्ण मिला शीशी में भर कर रख लें। नोट–कपूर सबसे पीछे…

  • Bilva Phaladi Churan

    Post Views: 173 बिल्वफलादि चर्ण गुण और उपयोग– यह चर्ण संग्राही हे अथांत्‌ पतले दस्त को रोकता तथा आँतां को बलवान बनाता है। इस चर्ण क सेवन से आम और खनयक्त संग्रहणी नष्ट हो जाती है। संग्रहणी की पुरानी अवस्था में–आँतों में खराश हो जाती अर्थात्‌ आँतें छिल जाती हैं, जिससे दस्त के समय थोड़ा-सा…

  • Chopchiniadi Churan

    Post Views: 176 चोपचिन्यादि चूर्ण मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि: चोपचीनी का चूर्ण 16 तोला, खाँड़ 4 तोला, पीपल, पीपलामूल, लौंग, काली मिर्च, अकरकरा, खुरासानी अजवायन, सोंठ, वायविडङ्ग और दालचीनी-प्रत्येक दवा 1-1 तोला लेकर कूट-छान चूर्ण बना लें। मात्रा और अनुपान: 3 से 6 माशा, सुबह-शाम। शहद और घी न्यूनाधिक मात्रा में मिला कर दें…

  • Lai Churan

    Post Views: 286 लाई चूर्ण गुण और उपयोग (Uses and Benifits )— इस चूर्ण के सेवन से संग्रहणी, शूल, अफरा ओर अतिसार का नाश हाता तथा मर्न्दाग्न दूर हाती ह ओर पाचन शक्ति बढ़ता है। संग्रहणी की प्रारम्भिक अवस्था मे इसक उपयोग से बहुत लाभ होता है। यह पाचक पित्त को उत्तजित कर पाचन क्रिया…

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    Mahatikat Ghrit

    Post Views: 190 महातिक्त घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : यह घृत कुष्ठ, रक्तपित्त, खूनी बवासीर, विसर्प, अम्लपित्त, वातरक्त, -पाण्डु रोग, विस्फोट, यक्ष्मा, उन्माद, कामला, -पामा, कण्डू, जीर्णज्चर, रक्तप्रदर आदि रोगों को नष्ट करता है। शरीर पर लाल चकत्ते हो जाना, फोड़े-फुन्सी होना, उनमें दाह या जलन रहना, पीब या पानी-सा लेस निकलता हो,…

  • Yawanikhandav Churna

    Post Views: 174 Yawanikhandav Churna Properties and uses– Putting some dry powder in this powder in the mouth in the morning cures anorexia. Apart from this, it purifies the tongue and throat. It is a digestive and is very beneficial for diseases like gas in the stomach, not being able to pass gas, indigestion, mandagni…