Anu Tel
अणु-तैल
गुण और उपयोग (Uses and Benefits) :
- इन्द्रियं कों अपने वश में रखें, तो यह तैल तीनों दोषों (बढ़े हुए) को नष्ट करता है।
- इन्द्रियों की बलवृद्धि करता है।
- इस तैल का समुचित काल में विधिपूर्वक प्रयोग करने से मनुष्य उत्तम गुणों को प्राप्त करता है।
- मनुष्य को अणु तैल का नस्य प्रतिवर्ष जब आकाश मेघाछन्न न हो प्रावट, शरद और बसन्त तीनों ऋतुओं में लेना चाहिए।
- जो मनुष्य यथासमय इसके नस्य का सेवन करते हैं, उनके आँख, नाक, कान आदि इन्द्रियों की शक्ति की वृद्धि होती है और सिर तथा मूँछ के बाल श्वेत तथा कपिलवर्ण के नहीं होते और न गिरते हैं, किन्तु उत्तम प्रकार से बढ़ते हैं।
- इसके अतिरिक्त इस तैल का नस्य लेने से मन्यास्तम्म, शिरःशूल, अर्दित, हनुग्रह (ठोड़ी का जकड़ना), पीनस, अर्धावभेदक, -शिरःकम्प (वातनाड़ियों की दुर्बलता से सिर का हिलना) येविकार नष्ट होते हैं यथा सिर और कपाल की शिरायें, सन्धियाँ, स्नायु, कण्डरा आदि परिपुष्ट होकर बलवान हो जाती हैं।
- मुख प्रसन्नचित तथा चेहरा उपचित (भरा हुआ), -स्वर स्निग्ध, स्थिर और गम्भीर हो जाता है।
- समस्त इन्द्रियाँ निर्मल, शुद्ध, और बलयुक्त हो जाती हैं।
- ऊर्ध्वजन्रु में होने याले विकार सहसा आक्रमण नहीं करते एवं वृद्धावस्था प्राप्त होते हुए भी उत्तमांगों को बुढ़ापा नहीं सताता।
मात्रा और प्रयोग का तरीका(Dose and direction of use): सर्वप्रथम उत्तमांग (अर्थात् शिर) का स्नेहन, स्वेदन करके, पिचु (रूई का फाहा) तैल में भिंगोकर तीन बार नस्य लें। इन नस्यों की मिलित मात्रा आधा पल है। इस प्रकार तीन नस्य रत्ति तीसरे दिन लेने चाहिए। नस्य लेने वाले पुरुष को निर्वात (जहाँ वायु सीधा प्रवेश न करे) स्थान में रहना चाहिए–(अर्थात्) उष्ण स्थान में रहें, हितकारी भोजन का सेवन करें I
मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि ( Main Ingredients and Method of Preparation): – सफेद चन्दन, अगर, तेजपात, दारुहल्दी की छाल, मुलेठी, बलामूलछाल, पुण्डरीककाष्ठ, छोटी इलायची, वायविडंग, बेल छाल, कमल फूल, नेत्रबाला, .खस, केवटीमोथा, दालचीनी, नागरमोथा, अनन्तमूल, शालपर्णी, जीवन्ती, पृश्निपर्णी, देवदारु, शतावर, रेणुका, छोटी कटेरी, सुरभि (शल्लकीत्वक्) कमलकेशर–ये प्रत्येक द्रव्य ।-। तोला लेकर जौकुट करें और 2600 तोला माहेन्द्र जल (बरसात का जमीन पर न गिरा हुआ अर्थात् पात्र में संचित किया हुआ वर्षा का जल) में डालकर क्वाथ कर, जब दशमांश जल शेष रह जाय तो उतार कर, छान लें। इसमें तिल तैल 26 तोला लें, फिर उपरोक्त 260 तोले क्वाथ के दस भाग करें और प्रथम पाक में 26 तोला तैल और 26 तोला क्वाथ डालकर पाक करें। पाक सिद्ध हो जाने पर पुनः पूर्वपाचित 26 तोला तैल में और 26 तोला क्वाथ मिलाकर पाक करें। इस प्रकार 9 बार पाक करें, अन्तिम पाक में पूर्वपाचित 26 तोला तैल शेष 26 तोला क्वाथ और बकरी का दूध 26 तोला मिलाकर पाक करें। पाक सिद्ध हो जाने पर छान कर सुरक्षित रखें। चरक सूत्रस्थान अ. 5
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