Similar Posts

  • Unmadgajkesri Ras

    Post Views: 27 उन्मादगजकेशरी मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   शुद्ध पारा, शुद्ध गन्धक, शुद्ध मैनशिल और धतूरे के बीज समान भाग लेकर चूर्ण करके बच के क्वाथ की और ब्राह्मी रस की 7-7. भावना देकर रखें। र. रा. सु. मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)–  2 से 4 रत्ती,…

  • Chitrakadi Vati

    Post Views: 157 चित्रकादि बंटी: मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि : चित्रकमूल की छाल, पीपलामूल, सज्जीखार, यवक्षार, सेँधानमक, संचर नमक, काला नमक, समुद्र नमक, सांभर नमक, सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, घी में सेंकी हुई हींग, अजमोद, चव्य–प्रत्येक समान भाग लेकर कूट-कपड़छन चूर्ण बना बिजोरा या दाड़िम के रस में 7 दिन मर्दन कर, चने…

  • Shrikhandasava

    Post Views: 165 श्रीखंडासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से मद्यजनित रोग यथा–पानात्यय, पानविभ्रम, पानाजीर्ण आदि रोग दूर होते हैं। पैत्तिक (पित्तजन्य) रोगों में इसका विशेष उपयोग किया जाता है। रक्तपित्त, प्यास कीं अधिकता, बाह्यदाह और अन्तर्दाह, रक्तदोष, मूत्रकृच्छू, मूत्राघात, शुक्रदोष आदि विकारों में भी यह उत्तम लाभदायक है। मात्रा और अनुपान …

  • Vatari Ras

    Post Views: 12 वातारि रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारा 1 तोला, शुद्ध गन्धक 2 तोला, त्रिफला चूर्ण मिश्रित 3 तोला, चित्रक मूल की छाले 4 तोला, शुद्ध गूगल 5 तोला लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कञ्जली बनावें। पश्चात्‌ शुद्ध गूगल को एरण्ड तैल में डालकर पतला करें…

  • Mahatriphaladi Ghrit

    Post Views: 106 महात्रिफलादि घृत गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से रक्तदुष्टि, रक्तस्रांव, रतौंधी, तिमिर, आँखो में ज्यादा दर्द होना, आँखों से कम दिखाई पड़ना, शरीर की कमजोरी आदि नेत्ररोग दूर होते हैं। त्रिफला की महिमा आयुर्वेदशास्त्र में बहुत वर्णित है तथा इसके उपयोग से लाभ उठाने वाले भी बहुत देखे…

  • Pitantak Ras

    Post Views: 14 पित्तान्तक रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  जावित्री, जायफल, जटामांसी, तालीशपत्र, श्वेत चन्दन, स्वर्णमाक्षिक भस्म, प्रवाल भस्म या पिष्ठी, लौह भस्म, अभ्रक भस्म, कपूर–प्रत्येक 1-1भाग, रौप्य भस्म सब द्रव्यों के बराबर लेकर प्रथम चूर्ण कराने योग्य द्रव्यों का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण करें। पश्चात्‌ चूर्ण और समस्त…