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  • Swaranmalini Basant ( Vrihat )

    Post Views: 10 सुवर्णमालिनी वसन्त रस ( बृहत्‌ ) मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation): –  स्वर्ण भस्म (या वर्क) 3 तोला, प्रवाल पिष्टी 3 तोला, शुद्ध हिंगुल 6 तोला, सफेद मिर्च चूर्ण 10 तोला, कस्तूरी 1 तोला, गोरोचन 1 तोला, नाग भस्म 2 तोला, बंग भस्म 3 तोला, अभ्रक भस्म…

  • Ashtdashang Loh

    Post Views: 296 अष्टादशांग लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह मण्डूर पीलिया (कामला), हलीमक और शोथ (सूजन) आदि की अमोघ दवा है। अनेक कटु-तिक्त औषधियों के साथ लौह का संयोग होने से श्वास, खाँसी, रक्तपित्त, अर्श (बवासीर), संग्रहणी, आमवात, रक्त विकार, कुष्ठ और कफ के रोग भी नष्ट होते हैं। मात्रा और…

  • Mahavatvidhvanshan Ras

    Post Views: 40 महावातविध्वंसन रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, नाग भस्म, बंग भस्म, लौह भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, पीपल, शुद्ध टंकण, सोंठ, कालीमिर्च–ये प्रत्येक द्रव्य 1-1 भाग लें और वत्सनाभ विष 4 भाग लेकर प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बनावे, पश्चात्‌ अन्य चूर्ण करने…

  • Apurvemalini Basant Ras

    Post Views: 62 अपूर्वमालिनी बसन्त मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –   वैक्रान्त भस्म, अभ्रक भस्म, ताम्रभस्म, स्वर्णमाक्षिक भस्म, रौप्य भस्म, बंग भस्म, प्रवाल भस्म, रससिन्दूर, लौह भस्म, शुद्ध टंकण, शंखभस्म–ये सब द्रव्य समान भाग लेकर खरल में एकत्र पीसकर खस के क्वाथ, शतावरी का रस या क्वाथ, हल्दी का रस…

  • Lavangadi Churan

    Post Views: 305 लवंगादि चूर्ण  गुण और उपयोग (Uses and Benifits )—— यह चूर्ण रुचि उत्पन्नकारक, अग्निप्रदपक, बलकारक, पौष्टिक ओर त्रिदोष-नाशक है तथा छाती की धड़कन, तमकश्वास, गलग्रह, खाँसी, हिचकी, यक्ष्मा, पीनस, ग्रहणी, अतिसार और प्रमेह को शीघ्र नष्ट करता है। अधिक दिनों तक ज्वर आकर छूटने के बाद जो कमजोरी रहती है, उसमें किसी…