Similar Posts

  • Amritmanjari Gutika

    Post Views: 257 अमृतमञ्जरी गुटिका  गुण और उपयोग (Uses and Benefits– इस वटी का उपयोग करने से कठिन सन्निपात रोग शीघ्र नष्ट होते हैं और समस्त प्रकार के अग्निमांद्य, अजीण, भयंकर आमवात आदि रोगों को शीघ्र नष्ट करती है। इसके अतिरिक्त पाँचों प्रकार के कास रोग और श्‍वास रोग सम्पूर्ण अंग जकड़ जाना, जीर्ण ज्वर,…

  • Yakshmantak Loh

    Post Views: 253 यक्ष्मान्तक लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- इसके सेवन से राजयक्ष्मा, पाण्डु, स्वरभंग, खाँसी और क्षतक्षय भी नष्ट हो जाते हैं। इससे बल-वर्ण, अग्नि तथा शरीर की पुष्टि होती है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)  :-  2-4 रत्ती सुबह-शाम धारोष्ण बकरी के दूध या वासा (अडूसा) स्वरस, और मधु…

  • Mustakarist

    Post Views: 117 मुस्तकारिष्ट गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इस अरिष्ट के उपयोग से जीर्ण और नवीन अतिसार तथा संग्रहणी रोग नष्ट होते हैं। इसके अतिरिक्त यह अजीर्ण, मन्दाग्नि, विसूचिका (हैजा) और उदर रोगों को नष्ट करता है और दस्त के पतलेपन को गाढ़ा कर देता तथा प्रकुपित उदरवात को शमन कर जठराग्नि को…

  • Guduchiadi Kwath

    Post Views: 39 गूडूच्यादि क्वाथ गुण और उपयोग (Uses and Benefits– यह क्वाथ सब प्रकार के ज्वर, दाह, जी मिचलाना, वमन होना और अरुचि आदि को भी दूर करता तथा अग्नि को भी प्रदीप्त करता है। इस क्वाथ में रोहेड़ा की छाल, दारुहल्दी, सरफोंका की जड़ और पुनर्नवा (गदहपुर्ना) -के मूल, ये चार दवा और…

  • Rasmanikye

    Post Views: 11 रसमाणिक्य मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध वंशपत्री (तवकी) हरताल को चूर्ण कर श्वेत अभ्रक-पत्रों पर बिछाकर उस पर दूसरे श्वेत अभ्रक पत्रों को रख कर बेर के पत्तों के कल्क से या मुलतानी मिट्टी और कपड़े से उसकी सन्धि बन्द कर दें, पश्चात्‌ जब तक…

  • Saptgun Oil

    Post Views: 103 सप्तगुण तैल गुण और उपयोग (Uses and Benefits): इस तैल्ल के उपयोग करने से समस्त प्रकार के वातविकार नष्ट होते हें I आग से जलना, चोट लगना, शरीर के किसी भी अंग में मोच आ जाना, वायु का शूल, गठिया, कान का दर्द या बहना, फोड़ा, फुन्सी, शोथ, पार्श्वशूल एवं अनेक प्रकार…