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  • Balyakritari Loh

    Post Views: 192 बालयकृदरि लौह गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  :- यह लौह बच्चे के कष्टसाध्य यकृत्‌-प्लीहा ज्वर, शोथ, विबन्ध (कब्जियत), पाण्डु, खाँसी, मुखरोग, मुख के छाले और उदर रोगों को नष्ट करता है। बाल यकृत्‌ विकृत दूध पीने, छोटी अवस्था से ही अन्नादि खिलाने अथवा बचपन में मिश्री, चीनी, लड्डू आदि विशेषतया खाने…

  • Drakshasava

    Post Views: 207 द्राक्षासव गुण और उपयोग (Uses and Benefits)  : इसके सेवन से ग्रहणी, बवासीर, क्षय, दमा, खाँसी, काली खाँसी और गले के रोग, मस्तक रोग, नेत्र रोग, रक्तदोष, कुष्ठ, कृमि, पाण्डु, कामला, दुर्बलता, कमजोरी, आमज्वर आदि नष्ट हो जाते हैं। यह सौम्य, पौष्टिक तथा बलवीर्यवर्द्धक है। मात्रा और अनुपान  (Dose and Anupan)  :- 2 से…

  • Navratan kalp amrit Ras

    Post Views: 15 नवरत्नकल्पामृत रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  माणिक्य पिष्टी, नीलम पिष्टी, पन्ना पिष्टीं, पुखराज पिष्टी, वैडूर्य पिष्टी, गोमेदमणि पिष्टी, मुक्ता पिष्टी-ये प्रत्येक द्रव्य ।-। तोला, रौप्य भस्म, राजावर्त पिष्टी, प्रवाल पिष्टी-ये प्रत्येक द्रव्य 2-2 तोला, स्वर्ण भस्म, लौह भस्म, यशद भस्म, अभ्रक भस्म प्रत्येक 6-6 माशे,…

  • Chanderanshu Ras

    Post Views: 26 चन्द्रांशु रस मुख्य सामग्री तथा बनाने विधि  ( Main Ingredients and Method of Preparation) –  शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक, अभ्रक भस्म, लौह भस्म, बंग भस्म-प्रत्येक दवा समान भाग लेकर, प्रथम पारा-गन्धक की कज्जली बना, पश्चात्‌ अन्य भस्में मिलाकर घृतकुमारी के रस में घोंट कर 2-2 सत्ती की गोलियाँ बना, सुखा कर रख लें। —भै….

  • Amritmanjari Gutika

    Post Views: 248 अमृतमञ्जरी गुटिका  गुण और उपयोग (Uses and Benefits– इस वटी का उपयोग करने से कठिन सन्निपात रोग शीघ्र नष्ट होते हैं और समस्त प्रकार के अग्निमांद्य, अजीण, भयंकर आमवात आदि रोगों को शीघ्र नष्ट करती है। इसके अतिरिक्त पाँचों प्रकार के कास रोग और श्‍वास रोग सम्पूर्ण अंग जकड़ जाना, जीर्ण ज्वर,…